Valentine Day मनाना कैसा है? इस दिन की History क्या है?

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क्या आप जानना चाहते है की इस्लाम में Valentine Day मनाना कैसा है और Valentine Day की History क्या है, तो ये आपके लिए सही Post है.

हमारे देश भारत को त्योहारों का देश माना जाता है क्यूंकि यहाँ सभी लोग मिल कर एक साथ सारे त्योहारों को खुसी से मनाते हैं लेकिन सबसे ज्यादा गैर मुस्लिम का त्यौहार होता है, जैसे होली, दिवाली, क्रिसमस इत्यादि. इस्लाम में कुफ्र की त्यौहार मनाना जाइज़ नहीं है.

Valentine Day मनाना कैसा है

इस्लाम में VALENTINES DAY मनाना बिलकुल हराम है ये एक बेहूदा दिन है जिसमें लोग बेहयाई और जिना को बढ़ावा देते है जबकि इस्लाम इन सब बातों से हमको मना करता है. हमारे सामने कोई त्यौहार या कोई खास दिन आता है तो हम सब बिना सोचे समझे दूसरे लोगों को देख कर उस पर अमल करना शुरू कर देते हैं उस वक्त हम यह नहीं सोचते कि यह काम यह अमल हमारे दिन में हमारे इस्लाम में जायज है या नाजायज है।

यह काम हमारे इस्लाम में इसकी इजाजत दी है या नहीं दिए हम इस बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचते जिस तरीके से आज हम हैप्पी न्यू ईयर और Marry Cristmas मनाते हैं यह सब आजकल के इस दौर में ट्रेंड चल रहा है कि लोग एक दूसरे का हैप्पी बर्थडे मानते है और वैलेंटाइंस डे मनाते है इन सब चीजों की इजाजत इस्लाम में बिल्कुल नहीं है।

हजरत अब्दुल्ला बिना उमर रजि अल्लाहु ताला अन्हू से रिवायत है कि रसूल अकरम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया “हया और इमान दोनों साथी हैं बस जब इन दोनों में से एक उठाया जाता है तो दूसरा भी उठा लिया जाता है” (मिस्कत उल मसाबीह 1432)

हजरत उमर रजि अल्लाह ताला अनु से रिवायत है कि रसूले अकरम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि “कोई मर्द जब किसी औरत के साथ तनहाई में होता है तो वहां उन दोनों के अलावा तीसरा आदमी शैतान भी जरूर मौजूद होता है” (मिश्कात शरीफ)

इस हदीस से मालूम हुआ कि शैतान का काम ही है कि वह गुनाह करवाता है जब भी कोई मर्द और औरत के साथ तन्हाई में होगा तो शैतान भी वहां मौजूद होगा दोनों के जज्बात को उभारेगा और दोनों के दिलों में खराब काम करने का वस्वसा डालेगा.

इसी वजह से आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सख्ती के साथ ना महरम मर्द औरत को तनहाई में रहने की मुमानियत फरमायी है इसीलिए हमें इस चीज पर बड़ी सख्ती के साथ अमल करने की जरूरत है चाहे उस्ताद हो या पीर हो या मामू भांजा, भी चाचा का बेटा उसके पास तन्हाई में रहने और ना महरम औरत के साथ अकेले में बैठने उठने से बचने का इहतेमाम करना जरूरी है।

Valentine Day क्यों मनाते हैं?

Valentine day एक व्यक्ति के नाम पर रखा गया है जिसका नाम valentine था. इस प्यार के दिन की कहानी की शुरुआत प्यार से भरा हुआ नहीं है.

ये कहानी एक दुष्ट राजा और कृपालु संत valentine के बिच हुए मुठभेड़ के बारे में है. इस दिन की शुरुआत होती है Rome की तीसरी सदी से जहाँ एक अत्याचारी राजा हुआ करता था जिसका नाम Claudius था.

Rome के राजा का ये मानना था की एक अकेला सिपाही एक शादी शुदा सिपाही के मुकाबले जंग के लिए एक उचित और प्रभावशाली सिपाही बन सकता है क्यूंकि शादी शुदा सिपाही को हर वक़्त बस इसी बात की चिंता लगी रहती है की उसके मर जाने के बाद उसके परिवार का क्या होगा.

और इसी चिंता से वो जंग में अपना पूरा ध्यान नहीं दे पाता है. यही सोच कर Claudius राजा ने ऐलान किया की उसके राज्य का कोई भी सिपाही शादी नहीं करेगा और जिस किसी ने भी उसके इस आदेश का उलंघन किया तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी.

राजा के इस फैसले से सभी सिपाही दुखी थे और उन्हें ये भी पता था की ये फैसला गलत है लेकिन राजा के डर से किसी ने भी इसका उलंघन करने का हिम्मत नहीं किया और उनकी इस आज्ञा का पालन करने के लिए मजबूर हो गए.

लेकिन Rome के संत Valentine को ये नाइंसाफी बिलकुल मंजूर नहीं थी इसलिए उन्होंने राजा से छुपकर युवा सिपाहियों का मदद किया और उनकी शादी करवाने लेगे.

जो भी सिपाही अपने प्रेमिका से शादी करना चाहते थे वो valentine के पास मदद मांगने जाते थे और valentine उनकी मदद भी करते थे और उनकी शादी करवा देते थे. इसी तरह valentine ने बहुत से सिपाहियों की गुप्त शादी करवा चुके थे.

लेकिन सच ज्यादा दिन तक नहीं छुपता किसी ना किसी दिन वो सबके सामने बाहार निकल कर आ जाता है. उसी तरह valentine के इस कार्य के बारे में भी Claudius राजा के कान में खबर पहुँच गयी.

Valentine ने राजा के आदेश का पालन नहीं किया इसलिए राजा ने valentine को सजा-ए-मौत की सजा सुना दी और उन्हें जेल के अन्दर डाल दिया गया.

जेल के अन्दर valentine अपनी मौत की तारीख का इंतज़ार कर रहे थे और एक दिन उनके पास jailor आया जिसका नाम Asterius था. Rome के लोगों का केहना था की valentine के पास एक दिव्य शक्ति थी जिसके इस्तेमाल से वो लोगो को रोगों से मुक्ति दिला सकता था.

Asterius की एक अंधी बेटी थी और उसे valentine के पास बसी जादुई ताकात के बारे में पता था इसलिए वो valentine के पास जाकर उनसे विन्नती करने लगा की उसकी बेटी की आँखों की रौशनी को अपने दिव्य शक्ति से ठीक कर दे.

Valentine एक नेक दिल के इंसान थे और वो सबकी मदद करते थे इसलिए उन्होंने jailor की भी मदद की और उनकी अंधी बेटी की आँखों को भी अपनी शक्ति से ठीक कर दिया.

उस दिन के बाद से Valentine और Asterius के बेटी के बिच गेहरी दोस्ती हो गयी थी और वो दोस्ती कब प्यार में बदल गयी उन्हें पता ही नहीं चला. Asterius की बेटी को Valentine की मौत होने वाली है ये सोच सोच कर उसको गहरा सदमा लग गया था.

और आखिर कर वो दिन 14 फ़रवरी आ गया था जिस दिन valentine को फाँसी लगने वाली थी. अपनी मौत से पहले valentine ने jailor से एक कलम और कगाज़ माँगा और उस कागज़ में उसने jailor की बेटी के लिए अलविदा सन्देश लिखा, पन्ने के आखिर में उसने “तुम्हारा valentine” लिखा था, ये वो लफ्ज़ हैं जिसे आज भी लोग याद करते हैं.

Valentine के इस बलिदान के वजह से 14 फ़रवरी को उनके नाम से रखा गया और इस दिन को पूरी दुनिया में सभी प्यार करने वाले लोग valentine को याद करते हैं और एक दुसरे के साथ प्यार बाँटते हैं.

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