Ramzan Ki Fazilat Kya Hai Hindi | रमज़ान की फ़ज़ीलत व अहमिय

Ramzan Ki Fazilat Kya Hai
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Ramzan Ki Fazilat: रमज़ान की फ़ज़ीलत इस बात में कोई शक नहीं कि रमज़ान की फ़ज़ीलत तमाम महीनो से ज़ियादा है। माहे रमज़ान का हर लम्हा खैर का ह। रमज़ान का महीना बड़ा बरकत वाला है। हम को रमज़ान की फ़ज़ीलत मालूम होगी तभी और भी ज़ियादा हमारे नज़दीक रमज़ान की एहमियत और भी बढ़ जाएगी. बहुत ही खुश नसीब है वो शख्स जिसको रमज़ानुल मुबारक का महीना मिले और वो अपने गुनाहो को अल्लाह रब्बुल आलमीन से माफ़ करवा लें।

पियारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इरशाद फ़रमाया जब रमज़ान का महीना आता है तो आसमान के तमाम दरवाज़े खोल दिए जाते है और ज-हन्नम के दरवाज़े बंद करदिये जाते है और शयातीन को ज़ंजीर से जकड़ दिया जाता हे। (Sahih Bukhari 1899)

रमज़ान का महीना बड़ी नेमत है

किसी मुस्लमान के लिए ये बड़ी खुश नसीबी की बात है की उसे रमज़ान जैसा बड़ा बा बरकत महीना मिल जाए और इस महीने में नेकियां कमाने, गुनाहो की माफ़ी मांगने और अपने रब को राज़ी करने की तौफ़ीक़ मिल जाए।

रमज़ान की एहमियत किया है? (Ramzan ki Fazilat)

रमज़ानुल मुबारक का महीना अल्लाह तबारक व तअला की बहुत बड़ी नेमत है। इस महीने में अल्लाह की तरफ़ से बरकतो का सैलाब आता है और उसकी रहमतें बारिश की तरह बरसती है। जब तक हम रमज़ान कि फ़ज़ीलत नहीं जानेंगे तब तक हम को उसकी एहमियत का पता नहीं चलेगा। इसी तरह जब तक हम रमज़ान के मसाइल नहीं जानेंगे तब तक हम उसका सही फाईदा नहीं उठा पाएंगे।

रमज़ान में इबादत उसी तरह करना ज़रूरी है जिस तरह नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने किया और सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम को हुक्म दिया तभी  हमारी इबादत अल्लाह के नज़दीक क़बूल होगी.

आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और सहाबा के नज़दीक रमज़ान की एहमियत?

बुखारी शरीफ़ कि हदीस में आता है के जब रमज़ान का आखरी अशरा आता तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपना तहबन्द बांधते (सहीह बुखारी 2024)

तहबन्द बांधलेते यानि अल्लाह कि इबादत के लिए और भी ज़ियादा तैयार होजाते जैसे क़ियामुल लैल, तिलावते क़ुरान, सदक़ा और खैरात, ज़िक्रो अज़कार इन सब में और भी ज़ियादा लग जाते।

इसी तरह सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम भी रमज़ान से पहले ही इबादतों के बारे में सोचते रहते के उनकी इबादत अच्छे से हो सके कोई लम्हा उनका अल्लाह कि इबादत से खाली ना गुज़रे।

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रोज़े की फ़ज़ीलत (Ramzan ki Fazilat)

रोज़े कि बहुत बड़ी फ़ज़ीलत है जिस के बयान में बहुत सी हदीस ह। रोज़ा ऐसा अमल है जो अल्लाह तआला ने अपने साथ खास किया है और वो रोज़ादार को खुद ही बिला हिसाब अज्र और सवाब अता फरमाएंगे जैसा के हदीस में हे।

हदीस 1: नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया अल्लाह तआला फरमाता है के इंसान का हर नेक अमल खुद उसके लिए है मगर रोज़ा रोज़ा मेरे लिए है उसका बदला में दूंगा। (सही बुखारी 1904)

हदीस 2: तिर्मिज़ी कि हदीस में है के रोज़ादार कि दुआ रद नहीं होती (तिर्मिज़ी 2526)
इसके इलवा भी बहुत सी हदीस है जिसमे रोज़ा कि फ़ज़ीलत बयान कि गई है।

Ramzan Ki Fazilat Kya Hai

क्या रोज़ा रखने का मक़सद क्या है?

रोज़े कि बहुत सारी हिकमतें और फायदे है जिसका असल मक़सद तक़वा ही है। अल्लाह तआला क़ुरआने करीम में इरशाद फरमाते हे।

يا اَيها الَّذِيْنَ آمَنُوا کُتِبَ عَلَیکُمُ الصِّيَامُ کَمَا کُتِبَ عَلَی الَّذِينَ مِنْ قَبْلِکُمْ لَعَلَّکُمْ تَتَّقُوْن

तर्जुमा: ए ईमान वालों तुम पर रोज़ा ऐसे ही फ़र्ज़ किये गए है जिस तरह तुम से पहले लोगों पर फ़र्ज़ किये गए थे, ताके तुम मुत्तक़ी बन जाओ

(सूरह बक़रह: 183)

क़ुरआन  करीम के इस एलान के मुताबिक़ रोज़ा कि फ़र्ज़ियत का बुनयादी मक़सद लोगों कि ज़िन्दगी में तक़वा पैदा करना है।

रोज़ा का असल मक़सद तक़वा हासिल करना है. जब अल्लाह तआला कि रज़ा मंदी चाहते हुए और उसके अज़ाब के ख़ौफ़ से मुस्लमान हलाल चीज़ों से भी रोज़े कि हालत में रुक जाता है तो वो ज़रूर हराम चीज़ो से बचेगा।

रोज़े के आदाब किया है

नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: सेहरी खाया करो कियुँकि सेहरी खाने में बरकत है। (सहीह मुस्लिम 1095)

और दूसरी हदीस में है ये खाना बा बरकत है और सेहरी खाने में एहल किताब कि मुखालिफत भी पाई जाती है और फ़िर मोमिन कि सब से बेहतरीन सेहरी खजूर है।

एक और बुखारी कि हदीस में नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मेरी उम्मत के लोगों में उस वक़्त तक खैर बाक़ी रहेगी, जब तक वो इफ़्तार में जल्दी करते रहेंगे। (सही बुखारी 1957)

रोज़ेदार के तालुक से एक और हदीस में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: अगर कोई शख्स झूट बोलना और दग़ा बाज़ी करना (रोज़ा रख कर भी) ना छोड़े तो अल्लाह तआला को उसकी कोई ज़रूरत नहीं के वो अपना खाना पीना छोरदे. (सही बुखारी 1903)

लिहाज़ा रोज़ादार के लिए ज़रूरी है के वो हराम चीज़ से बचे जैसे चुगली, ग़ीबत, फहश गोई और झूट वगैरा से परहेज़ करे कियुँकि इन सब चीज़ो के करने से अक्सर उसके रोज़े का अज्र ही ज़ाए होजाता है।

तरावीह की फ़ज़ीलत

नमाज़े तरावीह मुस्तहब अमल है इस पर तमाम उलमा-ए-करम का इत्तिफ़ाक़ है, नीज़ नमाज़े तरावीह क़ियामुल लैल में शामिल ह। रमज़ान में क़ियामुल लैल उन बड़े इबादात में शामिल है जिन के ज़रिए इंसान क़ुर्बे इलाही हासिल करता है।

हदीस में आता है के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया जो शख्स रमज़ान में इमां और सवाब की उम्मीद से क़ियाम करे तो उसके गुज़िश्ता गुनाह माफ़ करदिये जाते है। (सहीह बुखारी 37)

शब-ए- क़दर की फ़ज़ीलत

हज़रात आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा बयान करती है के नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आखरी अशरा में इतनी कोशिश किया करते थे जितनी दूसरे दिनों में नहीं करते थे। (सहीह मुस्लिम 1175)

शबे क़दर के बारे में एक सूरह है जिसका नाम सूरह क़दर है इस सूरह में शबे क़दर के बारे में है के ये रात हज़ार महीनो से बेहतर है।

सूरह क़दर का तर्जुमा: हमने इस (क़ुरआन मदीद) को शबे क़दर में उतरा. और आप ने किया समझा के शबे क़दर किया है? शबे क़दर हज़ार महीनो से अफ़ज़ल हे। इस में फ़रिश्ते, रूहुल कुदुस (जिब्रील अलैहिस सलाम) के साथ अपने रब के हुक्म से हर बात का इंतिज़ाम करने को उतारते है। और सुबह तक ये सलामती की रात क़ाइम रहती है। (सूरह क़दर)

मुझे उम्मीद है Ramzan ki Fazilat आपको अच्छा लगा होगा अगर Ramzan ki Fazilat आपको अच्छा लगा होगा तो निचे कमेंट में बताए.

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