Quran Ki Fazilat Aur Ahmiyat | कुरान की फ़ज़ीलत

Quran Ki Fazilat Aur Ahmiyat
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आज हम आल लोगों इस आर्टिकल मे Quran Ki Fazilat के बारे में बता रहे है क़ुरआन मजीद की बहुत ही फ़ाज़िलत फ़ज़ीलत है। क़ुरआन शरीफ़ जो एक आसमानी किताब और अल्लाह का कलाम हे ये हमारे आख़री नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर नाज़िल हुई साथ ही साथ दूनया में सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली किताब हे।

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Quran Ki Fazilat (कुरान की फ़ज़ीलत)

इस से पहले आने वाली सारी आसमानी किताबें रद हो गई और कोई भी अपनी असली हालत में नहीँ हें ये सब क़ुरआन करीम के नाज़िल होने के इससे भी आप बाद हुआ हे इससे भी आप क़ुरआन की फ़ज़ीलत का अंदाज़ा लगा सकते है। क़ुरआन करीम आज भी अपनी असल सूरत में हें ओर इंशा अल्लाह क़यामत तक क़ुरआन मजीद मे कोई बदलाव नहीं आएगा। अल्लाह ने इसकी जुम्मेदारी ली हे अल्लाह ने Quran Majeed के अंदर हर वो बात बतादी हे जो इंसानी ज़िंदगी के लिए जरूरी हे।

क़ुरआन मजीद के अंदर लोगों के लिए हिदायत हे ये बाबरकत किताब हे कभी ना मिटने वाली किताब हे हमें इसपर फ़खर होना चाहिये इसमे मोमीनों केलिये हिदायत हे ये लोगों को बुरे कामों से रोकती हे ओर भलाई के कामों का हुक्म देती हे ओर नेकों कारों को बशारत सुनाती हे और सारी इंसानियत को फ़ितनों से बचाने वाली हे इसमे पूराने लोगों की बातें हें ताकि इंसान उससे सबक ले और आगे क्या होगा इसमे बताया गया हे।

क़ुरआन शारीफ़ का पढ़ने वाला कभी गुमराह नहीं होगा इंशा अल्लाह क़ुरआन मजीद लोगों को सीधा रास्ता दिखाता हे क़ुरआन कैरीम को मानने सेही दुन्या में सरबुलंदी हे इसी मे इज्ज़त भी हे क़ुरआन मजीद पर अमल करने मेही कामयाबी और भलाई है।

कुरान मजीद पढ़ने की फ़ज़ीलत

सही बुखारी मे आता हे के नबी करीम सल्लल्लाहु अलयही वसल्लम ने फ़रमाया “तुम में सब से बेहतर (अच्छा) वो हे जो क़ुरआन मजीद को पड़े ओर क़ुरआन को पढ़ाए” (बुखारी 5027)

एक और हदीस मे आता हे की “अल्लाह तआला इस किताब (क़ुरआन) की वजे से किसी को बुलंद (ऊपर उठाना) करता हे और किसी को पस्त (नीचे) करता हे”
(मुस्लिम 817)

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Quran Pak Sunne Ki Fazilat in Hindi

जी हाँ हमें पाक खामोशी से सुनना चाहिए कियुंकि अल्लाह तआला क़ुरआन मजीद में फ़रमाते हें “और जब क़ुरआन मजीद पढ़ा जाए तो उसे गौर से सुनो और ख़मोश हो जाओ ताके तुमपर रहम किया जाए ” (आराफ़ 204) क़ुरआन पाक की इस आयत से हमको पता चला की क़ुरआन पाक का खामोशी से सुनना अल्लाह के यहाँ रहम का ज़रिया बंता हे।

कुरान अटक अटक कर पढ़ना हिन्दी में

क़ुरआन मजीद को अटक कर पढ़ने के बारे में हदीस मे आता हे की “जो शख़्स क़ुरआन मजीद को अटक कर पढ़ता हो और उसको पढ़ने में काफ़ी दिक़्क़त (तकलीफ) होती होतो उसको दुगना सवाब मिलता हे।

Quran Pak Ko Bina Atke Padhna

उम्मुल मोमिनीन आईशा रजियललाहु अनहा से रिवायत हे की रसूलूल्लाह सल्लल्लाहु अलयही वसल्लम ने फ़रमाया जो शख़्स क़ुरआन मजीद के पढ़ नें में माहिर हो वो होनरेबल और नेक फ़रिश्तों के साथ होगा (मुत्तफ़क़ अलय) इसिलिए हमें चाहियें के हम भी क़ुरआन मजीद को रवानी से पढ़ने की कोशिश करें अगर नहीं आता हेतो क़ुरआन मजीद को उसके जानने वाले से सीख़ें अल्लाह हमें इसकी तोफ़ीक़ दे आमीन।

Quran Sharif Padhne Ka Sawab

क़ुरआन शरीफ़ पढ़ने के बारे मे बोहत सारी हदीसें ऊपर बताई गई हे कुरान के एक एक हर्फ़ पर दस दस नेकियाँ मिलती हे अलिफ़-लाम-मीम में अलिफ़ एक हर्फ़ हे लाम एक हर्फ़ हे और मीम एक हर्फ़ हे इससे आप अंदाजा लगा लिजीये की क़ुरआन मजीद कितनी फ़ज़ीलत वाली किताब हे।

Quran Ka Haq Kya Hai?

कुरान शरीफ पर ईमान लाना और उसके मुताबिक़ अमल करना, कुरान शरीफ मे जिन चीजों को हराम बताया गया उसे हराम मानना और जिन चीजों को हलाल बताया हे उसे हलाल मानना, कुरान शरीफ की तबलीग़ करना, कुरान शरीफ मे जो बताया गया हे उस पर अमल करना यही असल कुरान शरीफ का हक़ हे।

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Quran Ko Tarjuma Ke Sath Padhna

हदीस में आता हे “हज़रत अबूज़र रज़ियल्लाहु अनहु फ़रमाते हें के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुझ से इरशाद फ़रमाया तू सुबह को जा कर अल्लाह की किताब की एक आयत सीखे ये तेरे लिए 100 रकात से बेहतर हे और तू सुबह जाकर इल्म का एक बाब (सबक) सीखे चाहे इस पर उसी वक्त अमल करे या ना करे ये तेरे लिए 1000 रकात नमाज़ पढ़ने से बेहतर (अच्छा) हे”
(इबने माजा 219)

कुरान शरीफ को तर्जुमा के साथ पढ़े या बगेर तर्जुमा के दोनों में इंशा अल्लाह सवाब मिलेगा | अगर कोई इसको तर्जुमा के साथ पढ़ता हे तो उसको कुरान शरीफ की फ़ज़ीलत के बारे में पता चलता हे और कुरान मे जो एहकामात बताए गए हें इंसान वो जानता हे और उसे अपनी जिंदगी में लाने की कोशिश करता हे इसी लियें हमे चाहिए के तर्जुमा के साथ पढे इंशा अल्लाह ज्यादा सवाब मिलेगा।

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Quran Sharif Padhne Ki Fazilat in Hindi

हज़रत अबू उमामा रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं के मेने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फ़रमाते हुए सुना: क़ुरआन (Quran) कसरत से पढ़ा करो, इस लिए के क़यामत वाले दिन ये अपने पढ़ने वाले साथियों के लिए सिफ़ारिश बन कर आएगा। (मुस्लिम)

हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत हे “आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़र्माया बेशक वो शख़्स जिस के दिल में क़ुरान का कुछ हिस्सा (याद) न हो, वो वीरान घर की तरह है” (तिर्मिज़ी)

यानी वीरान घर खैरो बरकत और रहने वालों से ख़ाली होता है ऐसे ही उस शख़्स का दिल खैरो बरकत और रूहानियत से ख़ाली होता है जिसे क़ुरान शरीफ का कोई भी हिस्सा याद न हो।

Tilawat Ke Adaab

तिलावत कुरान के कुछ आदाब है, जिन का खियाल रखना चाहिए ताके क़ीरात अल्लाह तआला के यहां कबूल हो सके और सवाब मिल सके।

  • कुरान की क़िरात सिर्फ़ अल्लाह के लिए की जाए और उस का मक़सद खूशनूदी और सवाब हो
  • वज़ू करके के कुरान पाक की तिलवात करना चाहिए
  • तिलावत के वक़्त हाथों को बिला ज़रूरत इधर उधर न हिलाए और ना ही बिला ज़रूरत अपनी आँखों को इधर उधर न फेरे
  • मिसवाक करके अपना मुंह साफ़ करले
  • बेहतर ये हेके तिलावत के वक़्त क़िबला की तरफ़ मुंह करके बेठे कियुंके ये सबसे अफ़्ज़ल है
  • तिलावत कुरान से पहले “अऊज़ु बिल्लाहि मिनश-शैता निररजीम” और “बिस्मिल्ला हिररहमा निररहीम” पढे
  • कुरान ठेर ठेर कर पढे
  • तिलावत करते वक़्त हर हर्फ़ की अदाईगी अच्छे से करे
  • कुरान को तज्वीद के कवाइद के साथ पढे
  • जितना मुमकिन हो कुरान को अच्छी आवाज़ मे पढे
  • कुरान की तिलावत सुनते वक़्त ख़मोश रहना वाजिब है
  • कुरान का एहतराम करे, उसे ज़मीन पर न रखे और न कुरान के ऊपर कोई चीज़ रखे

Conclusion: Quran ki Fazilat

मुझे उम्मीद है की आपको quran ki fazilat क्या है आपको जानने को मिला अगर आपको Quran ki Fazilat आपको अच्छा लगा होगा तो निचे कमेट जरुर करे।

Quran ki Fazilat बारे में जानना बहुत जरुरी है।

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