Five Pillars of Islam | इस्लाम के 5 अरकान

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Five Pillars of Islam: जिसे अपना कर इंसान दुनया और आखिरत मे कामयाब हो सकता है और अल्लाह ने अपने बंदों केलिए इस्लाम को पसंद किया है। इस्लाम की बुनयाद (नींव) पांच चीजों पर है | आज आप लोगों को Islam Ke 5 Arkan in Hindi के बारे मे बताया जारहा है इस पोस्ट को पूरा पढे।

Islam Ke 5 Arkan Kon Kon Se Hai in Hindi

अल्लाह तआला फ़रमाता है “बेशक अल्लाह के यहां इस्लाम ही दीन है” (आल-इमरान 19)

Five Pillars of Islam (इस्लाम के पांच अरकान)

इस्लाम की बुनियाद पांच चीजों पर है जिन्हें हर मुसलमान को मानना और उस पर ईमान लाना ज़रूरी है जिस के बारे मे कुरान और हदीस शारीफ़ मे आया है।

Five Pillars of Islam Hadees: हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा से रिवायत हे के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया इस्लाम की बुनयाद (नींव) पांच चीजों पर रखी गई हे गवाही देना की अल्लाह के सिवा कोई माबूद बरहक़ नहीं और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल हें नमाज़ काइम करना (नमाज़ का पढ़ना) ज़कात अदा करना (ज़कात देना) हज करना और रमज़ान के रोज़े रखना (बुख़ारी 8)

इस्लाम में पूरे के पूरे दाखिल हो जाओ कुरान:अल्लाह तआला क़ुरआन में फ़रमाता हे “ए ईमान वालों इस्लाम में पूरे के पूरे दाखिलल होजाओ ” (बक़रह 208)

अब क़ुरआन की इस आयत के बाद किसी के लिए कोई गुंजाइश नहीं रहती की वो इस्लाम के पांच पिलर (Islam Ke Panch Pillars) में से किसी एक को भी छोड़े, अगर छोड़ता हे तो फिर उसका ईमान खतरें में हें

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Islam Ke 5 Arkan Ke Naam in Hindi

  1. गवाही देना के अल्लाह तआला के सिवा कोई माबूद बरहक़ नहीं और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल है
  2. नमाज़ का पढ़ना
  3. ज़कात देना
  4. हज करना
  5. रमज़ान के रोज़े रखना

पहला अरकान: श्हादत (गवाही देना) तौहीद और रिसालत का इक़रार

Islam Ke 5 Bunyadi Arkan मे पहला रुक्न दो चीजों पर है

तौहीद: पहले रुक्न का पहले हिस्सा अपनी ज़बान से इस बात की गवाही देना और दिल में इस बात का यक़ीन रखना के अल्लाह तआला के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं।

इस बात का यक़ीन रखना के हर चीजों का करने वाला अल्लाह हे वोही मौत और ज़िंदगी देता हे वोही रोज़ी का देने वाला हे वोही औलाद देने वाला हे नफ़ा व नुकसान का मालिक वोही हे अगर वो कोई चीज़ देने पर आजाए तो उसे कोई रोखने वाला नहीं और अगर वो कोई चीज़ रोक्दे तो उसे कोई देने वाला नहीं ज़मीन व आसमान का मालिक और ख़ालिक़ अल्लाह ही है

रिसालत: पहले रुक्न का दूसरा हिस्सा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के बंदे और उसके के रसूल है।

और इस बात का भी इक़रार करना के मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के बंदे और उसके आख़री नबी व रसूल हे जिनहे अल्लाह ने भेजा है ताके वो लोगों तक अल्लाह का सही दीन पोहंचा सके और हमारा इनपर ईमान रखना और आप को अल्लाह का रसूल मानना फर्ज़ हे वरना हम मोमिन नहीं कहलाएंगे।

दूसरा अरकान: नमाज़  पढ़ना (Namaz)

Islam Ke 5 Arkan मे से इस्लाम का दूसरा पिलर नमाज़ है जिस के बारे मे अल्लाह फरमाता है “बेशक नमाज़ मोमीनों पर फ़िक्स टाइम पर पढ़ना फ़र्ज़ हे” (निसा 103)

दीने इस्लाम का दूसरा पिलर नमाज़ है नमाज़ मोमीनों पर शबे मेराज पर फ़र्ज़ की गई है ईमान और कलमा का इक़रार करने के बाद दूसरा फरीज़ा नमाज़ हे ये नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आँखों की ठंडक हे इस्लाम और कुफ़्र के बीच फ़र्क करने वाली चीज़ नमाज़ हे ये हर हालत में मोमिन के ऊपर फ़र्ज़ हे और कयामत के दिन सबसे पहले नमाज़ के बारे में ही पूछा जाएगा जिसकी नमाज़ सही उसका सबकुछ सही इंशा अल्लाह। नमाज़ एक एसी इबादत हे जिसमें बच्चे को 7 साल की उम्र से पढ़ने का हुक्म दिया गया है नमाज़ गुनाहों को मिटा देती हें।

तीसरा अरकान: ज़कात (Zakat)

दीने इस्लाम का तीसरा पिलर ज़कात हे जिसका मतलब हे पाक करना ज़कात इस्लाम के पांच अरकान मे से एक रुक्न है। ये हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है अगर उसका माल ज़कात की हद में आता होतो। ज़कात का माल हमारे आसपास के जरूरत मंद लोगों को और अपने रिशतेदारों को देना चाहिए ताके वो आपकी दी गई जकात से फ़ायदा उठा सके जकात देने की वज़ा से  अल्लाह तआला माल को पाक कर देता हे। किसी के पास अगर 7.5 तोला सोना (gold) या फ़िर 52 तोला चांदी (silver) हो और उस माल पर एक साल पूरा होजाए तो उसे चाहिए की वो उस माल की ज़कात अदा करें।

जकात के बारे में अल्लाह का फ़रमान: “बेशक जो लोग ईमान के साथ नेक काम करते हें नमाजों को पढ़ते हें और ज़कात अदा करते हें उनका सवाब उनके रब के पास पर उनपर ना तो कोई डरहे न उदासी और ना ग़म” (बक़रह 277)

“और जो लोग सोना चांदी का खज़ाना रखते हें और अल्लाह की राह में खर्च नहीं करते उनहैं दर्दनाक अज़ाब की खबर पहुंचा दीजीए जिस दिन उस खज़ाने को आतिश दोज़ख में तपाया जाएगा फिरर उससे उनकी पैशानियां और पेहलू और पीठे दागी जाएंगी उनसे कहा जाएगा ये हे जिसे तुमने अपने लिए खज़ाना बना रखाथा पस अपने खज़ानों का मज़ा चखो” (तोबा 34-35)

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चौथा अरकान: हज्ज (Hajj)

Five Pillars of Islam का चौथा पिल्लर हज्ज है और ये इंसान पर पूरी ज़िंदगी में सिर्फ़ एक बार फ़र्ज़ हे आदमी की ताक़त के मुताबिक़ अगर इंसान को अल्लाह ने मालों दोलत दिया हेतो वो जाकर अल्लाह के घर की ज़्यारत करे जिसमें एहराम (सफ़ेद कपड़ा हाजियों केलिए खास हे) का बांधना अल्लाह के घर का तवाफ़ करना सफ़ा मरवा की सई करना बाल का कटवाना मिना में जाना अरफ़ा और मुज़-दलफ़ा में रुखना शैतान को कंकरी मारना सारे अमल करना हज केहलाता हे जो इस्लाम का चौथा पिलर है।

अल्लाह तआला क़ुरआन में फ़रमाता है: “और अल्लाह ने उन लोगों पर जो उसकी तरफ़ आसकते है अल्लाह के घर का हज फ़र्ज़ करदिया हे और जो कोई उसका इनकार करे तो अल्लाह पूरी दूनया से बेपरवा है ” (आल-इमरान 97)

नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया जिस शख़्स ने अल्लाह के लिए इस शान के साथ हज्ज किया के ना कोई गलत बात की और ना कोई गुनाह किया तो वो एसे पाक होजाएगा जैसा आज ही उस की मां ने पैदा किया (बुख़ारी 1521, मुस्लिम 1350)

पांचवा अरकान: रमज़ान के रोज़े रखना

Five Pillars of Islam मे से इस्लाम का पंचवा पिल्लर रमज़ान के रोज़े रखना है रमज़ान के रोज़े हर मुसलमान जिसे अल्लाह ने अच्छी सेहत दीहे आकिल व बालिग़ स्वस्त हे तो उसके ऊपर रमज़ान के महीने के रोज़ों का रखना फ़र्ज़ हे चाहे वो आदमी हो या औरत दोनों के ऊपर रोज़े फ़र्ज़ हे। रोज़े का असल मक़सद ये हेके इंसान मुत्तकी व परहेज़गार बंजाए। इंसान सुबह सादिक़ से लेकर सूरज के डूबने तक भूखा प्यासा रेहता हे और हलाल चीजों को भी अल्लाह के लिए छोड़ देता है | रोज़े के टाइम फिर एसे बंदे को अल्लाह तआला बड़ा सवाब देता है।

इस्लाम के पांचवे आर्कन के बारे मे अल्लाह तआला ने क़ुरआन मजीद में फ़रमाया

“ए ईमान वालों तुम पर रोज़े फ़र्ज़ कीये गए है जेसे तुम से पहले लोगों पर फ़र्ज़ हुएथे ताके तुम परहेज़गार बंजाओ” (बक़रह 183)

और अगर किसी से रोज़े छूट जाए कोई मजबूरी की वजासे तो उसे चाहिए की वो छूटे हुए रोज़ों की क़ज़ा करे।

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Conclusion

आज के इस लेख में हमने जाना की इस्लाम की बुनयाद 5 हें अगर कोई Five Pillars of Islam मे से एक भी पिल्लर को गिरादे तो उसने इस्लाम को ढा दिया है एसा नहीं होना चाहिए Islam Ke 5 Arkan का खास ख्याल रखें। अल्लाह हम सभी को Five Pillars of Islam पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे, आमीन। इस्लाम के पांच अरकान हिंदी में इस आर्टिकल को दूसरों तक शेयर करें ताके जिनको नहीं पता के इस्लाम के अरकान किया है उन्हे मालूम हो सके।

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