Chasht Ki Namaz ka Tarika, Time, Fazilat | चाश्त की नमाज़

Chasht Ki Namaz ka Tarika
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आज के इस लेख में हम चाश्त की नमाज़ का तरीका हिन्दी में बतारहे है Chasht Ki Namaz Ka Tarika, चाश्त की मामज़ का टाइम, चाश्त की नमाज़ की फ़ज़ीलत के बारे में विस्तार से जानेंगे अल्लाह तआला केहने सुनने से ज़्यादा अमल की तौफ़ीक़ दे आमीन। Chasht Ki Namaz Ka Tarika मालूम होना ज़रूरी है किसी भी अमल को करने से पहले उसका कुरआन व हदीस के मुताबिक होना चाहिए तभी वो अमल क़बूल होगा।

चाश्त की नमाज़ ये भी एक नमाज़ है Chasht Ki Namaz का पढ़ना भी आम नमाजों जैसा ही है जो फ़र्क़ हे वो हे चाश्त की नमाज़ का टाइम।

चाश्त की नमाज़ का टाइम

Chasht Ki Namaz Ka Waqt सुबह सूरज निकलने के बाद से शुरू होजाता है जिसे हम तुलूए आफ़ताब कहते हें तुलूए आफ़ताब के बाद हम नमाज़े इशराक़ पढ़ते हें इसकी भी बड़ी फ़ज़ीलत है।

अब बात करते हें चाश्त की नमाज़ के टाइम के बारे मे Chasht Ki Namaz Ka Waqt तुलूए आफ़ताब (सूरज निकलना) से लेकर ज़वाल के टाइम से पहले पहले आप चाश्त की नमाज़ पढ़ सकते है | यानि धूप एकदम कड़क होजाए और आदमी उसकी गरमी को मेहसूस करें तो आप समझ लीजिए के चाश्त की नमाज़ का टाइम (chasht ki namaz ka time) ख़तम होने वाला है आप चाश्त की नमाज़ पढ़लें वरना ज़वाल का टाइम शुरू होजाएगा।

चाश्त की नमाज़ की निय्यत (Chasht Ki Namaz Ki Niyyat)

Chasht Ki Namaz Ki Niyat (चाश्त की नमाज़) के लिए ज़ुबान से अल्फ़ाज़ पढ़ने की ज़रूरत नहीं है। निय्यत दिल के इरादे का नाम है निय्यत दिल से की जाएगी ज़ुबान से नहीं।

ज़ुबान से निय्यत करना नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और सहाबा ए करम से सहीह हदीस से साबित नहीं है और नाही ताबईन और तबा ताबईन रहमतुल्लाह अलैहिम से साबित है।

चाश्त की नमाज़ की रकात

चाश्त की नमाज़ (Chasht Ki Namaz) आप कम से कम दो रकात और ज़्यादा से ज़्यादा आठ रकात तक पढ़ सकते हें। नीचे हदीस शरीफ़ में चाश्त की नमाज़ की रकात के बारे मे बताया गया है।

Chasht Ki Namaz Ki Rakat Hadees 1: माज़ रज़ियल्लाहु अनहु ने हज़रत आईशा रज़ियल्लाहु अनहा से पूछा के नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चाश्त की नमाज़ कितनी रकात पढ़ते थे आप ने फ़रमाया चार रकात और कभी इससे ज़्यादा (सही मुस्लिम 719)

Chasht Ki Namaz Ki Rakat Hadees 2: उम्मे हानी रज़ियल्लाहु अनहा फ़रमाती हें के फतेह मक्का के दिन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इन के घर में दाखिल हुए और 8 रकात चाश्त की नमाज़ पढ़ी (सही मुस्लिम 336)

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चाश्त की नमाज़ का तरीक़ा (Chasht Ki Namaz Ka Tarika)

  • चाश्त की नमाज़ (chasht ki namaz) के लिए आप नियत करें
  • चाश्त की नमाज़ के लिए निय्यत दिल में करे ज़ुबान से अल्फ़ाज़ बोलने की ज़रूरत नहीं
  • दोनों हाथों को उठाकर “अल्लाहु अकबर” कहकर दोनों हाथ बांधे
  • फिर Chasht Ki Namaz के लिए सना पढ़े
  • चाश्त की नमाज़ में सना के बाद सूरह फ़ातिहह और दूसरी कोई सूरह पढ़े जो आप को याद हो
  • फिर Chasht Ki Namaz में “अल्लाहू अकबर” कहते हुए रुकू मे जाए और रुकू की दुआ पढ़े
  • रुकू से उठते हुए “समि-अल्लाहु लिमन हमिदह” कहे
  • फिर नमाज़े चाश्त में दोनों सजदह करें और सजदे की दुआ पढ़े
  • दोनों सजदे के बाद “अल्लाहु अकबर” कहते हुए दूसरी रकात के लिए खड़े होजाए
  • Chasht Ki Namaz के लिए पहली रकात की तरह दूसरी रकात भी मुकम्मल करें
  • नमाज़े चाश्त में दूसरी रकात के दोनों सज्दो के बाद बैठ जाए
  • दोनों रकात के बाद बेठने को तशहहुद कहते है
  • Chasht Ki Namaz में तशहहुद में अत्तहिययात, दरूद शरीफ़ और दूसरी दुआए पढ़े
  • दुआ पढ़ने के बाद सलाम फेरे पहले सीधे तरफ़ फिर उल्टे तरफ़
  • इस्तरह इंशाअल्लाह चाश्त की नमाज़ मुकम्मल होजाएगी

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Chasht Ki Namaz Ki Fazilat in Hindi

हज़रत अबू उमामा से रिवायत है के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जो आदमी अपने घर से वज़ू करके फ़र्ज़ नमाज़ केलिए निकले तो उसका सवाब उस आदमी के बराबर है जो एहराम बांध कर हज के लिए निकलता है। और जो आदमी तक्लीफ़ उठा कर चाश्त की नमाज़ (chasht ki namaz) के लिए निकले तो उस आदमी को उमरह करने वाले के बराबर का सवाब मिलता है ” (अबू दाऊद 558)

नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया की अल्लाह तबारक व तआला ने फ़रमाया ए आदम की औलाद तुम दिन के शुरू में मेरी रज़ा के लिए 4 रकातें पढ़ा करो में पूरे दिन के लिए तुम्हारे लिए काफ़ी होजाऊंगा (तिरमिज़ी 475)

अबू दर्दा रज़ियल्लाहु अनहु रिवायत करते है के मेरे दोस्त (रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने मुझे तीन कामों की तलक़ीन की है और जबतक में जिंदा हूं में इन्हें कभी नहीं छोडूंगा पहला हर महीने तीन दिन रोज़े रखना दूसरा चाश्त की नमाज़ (chasht kinamaz) पढ़ना और तीसरा वित्र पढ़े बगैर नहीं सोना (सही मुस्लिम 722)

आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया सुबह के वक़्त तुम में से हर एक के जिस्म के जोड़ की हड्डी पर सदक़ा वाजिब है

अल्लाह की तसबीह का हर क़ौल (यानि सुबहानल्लाह केहना) सदक़ा है,

और इसका हर क़ौल सदक़ा है हम्द (यानि अल्हमदुलिल्लाह केहना) सदक़ा है,

और इसकी अज़मत का ऐलान करने वाला हर क़ौल (यानि लाइलाह इल्लल्लाह केहना) सदक़ा है,

और आच्छाई का हुक्म देना सदक़ा है,

और बुराई से मना करना सदक़ा है, और दो रकात चाश्त की नमाज़ जो आदमी पढ़ेगा इन सब आमाल के बराबर है (सहीह मुस्लिम 720)

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आखरी बात:

आज के इस लेख में हम लोगों ने चाश्त की नमाज़ (Chasht Ki  Namaz) के बारे में जाना है चाश्त की नमाज़ का टाइम, Chasht Ki Namaz Ka Tarika, चाश्त की नमाज़ में कितनी रकात है और Chasht Ki Namaz में क्या पढ़े, Chasht Ki Namaz Ki Fazilat ये सारी चीज़ें आप को विस्तार से बताई गई है | अब हमारा फ़र्ज़ है के हम इन सारी बातों पर अमल करें और चाश्त की नमाज़ (Chasht Ki Namaz) की पाबन्दी करके चाश्त की नमाज़ का जो सवाब है वो हमें मिलसकें अल्लाह हमें इसकी तौफ़ीक़ दे आमीन |

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