Ayatul Kursi in Hindi | आयतुल कुर्सी हिंदी में

ayatul kursi in hindi
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आज हम आप लोगों को Ayatul Kursi in Hindi अरबी और रोमन इंग्लिश में बताएंगे। आयतुल कुर्सी क़ुरआन करीम की तमाम आयात से अज़ीम आयत है और जिस की बड़ी फ़ज़ीलत सहीह अहादीस से साबित है। ये आयतुल कुर्सी अल्लाह ताआला की सिफ़ात जलाल, उस की शान और उस की क़ुदरत व अज़मत पर आधारित निहायत जामे आयत है।

सहीह हदीस में Ayatul Kursi की बहुत फ़ज़ीलत बयान की गई है इसी तरह कुछ गलत और ज़ईफ़ हदीस भी मौजूद है जिसमे आयतुल कुर्सी के बारे में बताया गया है जो सहीह नहीं है लेकिन हम आप लोगों से आयतुल कुर्सी की वही फ़ज़ीलत बयान करेंगे जो सही हदीस में है।

किसी भी दुआ या अमल के करने से पहले उस के बारे में जान्ना ज़रूरी है के जो अमल आप करना चाहते है वो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने करने का हुक्म दिया है या नहीं तभी वो अमल क़बूल होगा वरना गलत फ़ज़ीलत मालूम करके अमल किया जाए तो गुनाह का काम होगा अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ अता फरमाए।

Ayatul Kursi in Hindi

हज़रत अबी बिन कअब रज़ियल्लाहु अन्हु से नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अर्ज़ फ़रमाया के अल्लाह की किताब में सब से ज़ियादा अज़मत वाली आयत कोनसी है? तो उन्होंने जवाब दिया के अल्लाह और उस के रसूल ही को इस का ज़ियादा इल्म है।

आप ने फिर येही सवाल किया, बार बार के सवालात पर उन्होंने जवाब दिया के आयतुल कुर्सी तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: अबू मुनज़िर अल्लाह आप के लिये आप का इल्म मुबारक करे। (सहीह मुस्लिम 810)

Ayatul Kursi ki Fazilat Ki Wajah

आयतुल कुर्सी में अल्लाह की तौहीद ख़ालिस और उस की मुकम्मल मारिफ़त इस अंदाज़ से पेश की गई है के जैसे किसी दूसरी आयत में नहीं मिलती और मसला तौहीद की अहमियत और अज़मते शान का आलम ये हे के दुन्या में भेजे जाने वाले तमाम रसूलों को ये ही हुक्म दिया गया के वह इंसानियत के सामने सब से पहला दरस तौहीद ख़ालिस का रखें। Ayatul Kursi में अल्लाह के सिफ़ात को बयान किया गया है।

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Ayatul Kursi in Arabic Text

 ۚاَللّٰـهُ لَا إِلٰـٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ

ۚلَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ

 ۗلَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْ‌ضِ

 ۚمَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِندَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ

 ۖيَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ

 ۚوَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ

ۖوَسِعَ كُرْ‌سِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْ‌ضَ

 ۚوَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا

وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ

आयतुल कुर्सी हिंदी में

अल्लाहु लाइला-ह इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम,

ला त’अ खुज़ुहू सिनतुव वला नौम,

लहू मा फ़िस-समावाति वल अर्ज़,

मन ज़ल्लज़ी यशफ़उ इन्दहू इल-ल बि-इज़निह,

य’अ-लमु मा बैना अैदीहिम वमा ख़ल्फ़हुम,

व-ल युहीतू-न बिशैइम मिन इलमिहि इल-ल बिमा शाअ,

व सि-अ कुर सिय्युहुस समावाति वल अर्ज़,

व-ल यऊदुहू हिफ़्ज़ुहुमा,

व-हुवल अलिययुल अज़ीम

Ayatul Kursi in Hindi Tarjum Ke Sath

अल्लाह वह ज़ात है जिसके इलावा कोई सच्चा माबूद नहीं हमैशा ज़िंदा रहने वाला और (सब) को क़ाइम रखने वाला हे, न उसे ऊंघ आती हे न नींद, उसी के लिये हे जो आसमानों में हे और जो ज़मीन में हे, कौन हे जो उसकी इजाज़त के बगैर उसके पास सिफ़ारिश कर सके, जो लोगों के सामने हे और जो उनके पीछे हे सब को जानता हे, लोग उसके इल्म में से किसी चीज़ का अहाता नहीं कर सकते मगर जो वह चाहे, उसी की कुर्सी आसमानों और ज़मीन को घेरे हुए हे, और दोनों की हिफाज़त उसे थकाती नहीं, और वह बुलंद अज़मत वाला हे।

Ayatul Kursi in Roman English

Allahu la ilaha illa hu-wal hayyul qayyum,

Laa ta’a khuzuhu sinatuv walaa naum,

Lahu ma fis samaawaati wal arz,

Man zallazee yash fa’u indahu illa bi iznih,

Ya’a lamu maa bayna aydeehim wamaa khalfahum,

Walaa yuhee toona bi shay-im min ilmihi illa bimaa shaa’a,

Wasia kursiyyu hus samaawaati wal arz,

Walaa ya ooduhu hifzu humaa,

Wa hu-wal aliyyul azeem.

आयतुल कुर्सी हिंदी में शैतान से हिफ़ाज़त

हज़रत अबू हुरैरह रज़ियल्लाहु अन्हु ने बयान किया के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुझे रमज़ान की ज़कात की हिफाज़त पर पहरा देने के लिये फ़रमाया। (रात) में अचानक एक शख़्स आया और माल को समेट समेट कर अपनी चादर में भरने लगा मेने उसे पकड़ लिया और कहा के क़सम अल्लाह की में तुझे रसूलुल्ला सल्लाल्ल्हू अलैहि व सल्लम की ख़िदमत में ले चलूंगा। इस पर उसने कहा की अल्लाह की क़सम में बहुत मुहताज हु मेरे बाल बच्चे है और में सख़्त ज़रुरत मंद हूं। अबू हुरैरह रज़ियालहु अन्हु ने कहा में ने उसे छोड़ दिया।

सुबह हुई तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुझ से पुछा, ए अबू हुरैरह गुज़िश्ता रात तुम्हारे क़ैदी ने किया किया था? मेने कहा या रसूलुल्लाह उसने सख़्त ज़रूरत और बाल बच्चो का रोना रोया, इस लिये मुझे उस पर रहम आगया और मेने छोड़ दिया। नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया वो तुम से झूट बोलकर गया वह फिर आएगा।

इसी तरह वह दूसरी मर्तबा भी आया फिर उस के बाद तीसरी मर्तबा आया तो अबू हुरैरह रज़ियालहु अन्हु ने अब तो तुझे नबी सल्लाहु अलैहि व सल्लम की ख़िदमत में पेश करना ज़रूरी होगया है ये तीसरा मौक़ा है। उस ने कहा के इस मर्तबा छोड़ दो में तुम्हें ऐसे चंद कलमात सिखादूँगा जिस से अल्लाह तआला तुम्हे फ़ायदा पहुंचाएगा।

मेने पूछा वह कलमात किया हैं? उस ने कहा, जब तुम अपने बिस्तर पर लेटने लगो तो आयतुल कुर्सी पूरी पढ़ लिया करो। एक निगरां फरिश्ता अल्लाह की तरफ़ से बराबर तुहारी हिफ़ाज़त करता रहेगा। और सुबह तक शैतान तुम्हारे पास कभी नहीं आसके गा। इस तरह उसने आयतु कुर्सी सिखाई सुबह नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अबू हुरैरह रज़ियालहु अन्हु ने सारा वाक़िआ आप से बयान फ़रमाया इस पर नबी सल्लाल्ल्हू अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया वो झूटा था लेकिन तुम से ये बात सच कह गया। और आप ने फ़रमाया तीन रातों से ये जो आरहा था वो शैतान था। (सहीह बुख़ारी 2311)

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आयतुल कुर्सी के दस जुमले (Ayatul Kursi Benefits & Meaning)

आयतुल कुर्सी का पहला जुमला

لَا إِلٰـٰهَ إِلَّا هُوَ

ला इला-ह इल्ला हु (अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं)

इंसान के ज़हन में इबादत के लिये पहली तहरीक अपनी हाजत मंदी से पैदा होती है। यह किसी की इबादत का खियाल तक नहीं कर सकता जब तक उसे ये गुमान न हो के वह उस की हाजतें पूरी कर सकता है ख़तरात और मुसीबत से उसे बचा सकता है बेचैनी के हालत में उसे सुकून दे सकता है।

माबूद के लिये इलाह का लफ्ज़ जिन तसव्वुरात की बिना पर बोला वह ये है:
हाजत को पूरा काने वाला, पनाह देने वाला, सुकून बख्श ने वाला, मुआफ़ करने वाला, इन इख़्तियारात और इन ताक़तों का मालिक अल्लाह रब्बुल आलमीन ही है।

आयतुल कुर्सी का दूसरा जुमला

اَلْحَيُّ الْقَيُّومُ

अल हय्युल क़य्यूम (हमेशा ज़िंदह रहने वाला दूसरों को क़ाइम करने वाला)

तमाम मख़लूक़ात को मौत आना है नेक और बुरा हर कोई मौत का पियाला पी कर रहेगा। अल्लाह तआला की ज़ात ही हमेशा ज़िंदह रहने वाली है बाकि सब खतम होने वाला है। सब अल्लाह के मुहताज है वह किसी का मुहताज नहीं । और वह तमाम मख़लूक़ात को क़ाइम करने वाला है।

इरशाद नबवी सल्लाल्ल्हू अलैहि व सल्लम है अल्लाह मौत से पाक है जबकि जिन व इन्स को मौत आजाएगी। (मुस्लिम 2717)

आयतुल कुर्सी का तीसरा जुमला

لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ

ला त’अ खुज़ुहु सिनतुव वला नौम (उसे न ऊंघ आती है न नींद)

आयतुल कुर्सी के इस के उस टुकड़े का मफ़हूम हे के अल्लाह तआला ऊंघ और नींद से पाक है, इस लिये के जो सो जाए वह माबूद नहीं हो सकता, अल्लाह तआला मख्लूक़ को नींद लाहिक करता है मगर खुद उसे नींद तो दूर की बात है उसे ऊंघ भी नहीं आती।

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया अल्लाह नहीं सोता और न उस के शायाने शान है के वह सोए, वह मीज़ान को झुकाता और उठाता है, रात का अमल दिन से पहले और दिन का अमल रात से पहले उस के पास पहुंच जाता है, उस का हिजाब नूर है, अगर वह अपने हिजाब को दूर हटा दे तो उसके चेहरे के अनवार व तजल्लियात से मख्लूक़ में से हर वह चीज़ जल कर राख होजाए जिस पर उस की नज़र पड़े।

आयतुल कुर्सी का चौथा जुमला (Ayatul Kursi)

لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْ‌ضِ

लहु मा फ़िस-समावाति वल अर्ज़ (जो कुछ आसमान और ज़मीन में है सब उसी का है)

आसमान और ज़मीन की हर हर चीज़ अल्लाह की मिलकियत है सभी चीज़ों का हक़ीक़ी मालिक अल्लाह तआला है। लोगों को जो कुछ उस ने दिया वह अमानत के तौर पर है, इसी लिये वह उन चीज़ों का इस्तेमाल मालिक की रज़ा मंदी के मुताबिक़ ही कर सकते है।

केह दीजिये ए अल्लाह! बादशाही के मालिक तू जिसे चाहे बादशाही देता है और जिस से चाहे बादशाही छीन लेता है और जिसे चाहे इज़्ज़त देता है और जिसे चाहे ज़लील कर देता है, तेरे ही हाथ में हर भलाई है, बेशक तू हर चीज़ पर पूरी तरह क़ादिर है। (आल इमरान 26)

आयतुल कुर्सी का पांचवा जुमला

مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِندَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ

मन ज़ल्लज़ी यशफ़उ इन्दहु इल-ल बि-इज़निह (कौन है जो उस के हां उस की इजाज़त के बगैर सिफ़ारिश कर सके?)

अल्लाह रब्बुल आलमीन की इजाज़त के बगैर कोई किसी की सिफ़ारिश नहीं कर सके गा आयतुल कुर्सी से पहली वाली आयत में इसी लिये ये कहा गया के क़यामत के दिन कोई शिफ़ाअत नहीं होगी

क़ुरआन मजीद में अल्लाह तआला का इरशाद है

लोगों जो ईमान लाए हो! उस में से खर्च करो जो हम ने तुम्हे दिया है, इससे पहले के वह दिन आए जिस में न कोई खरीद व फ़रोख़्त होगी और न कोई दोस्ती और न कोई सिफ़ारिश और काफ़िर लोग ही ज़ालिम है।

आयतुल कुर्सी का छठा जुमला – Ayatul Kursi

يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ

य’अ-लमु मा बैना अैदीहिम वमा ख़ल्फ़हुम (वह जानता है जो कुछ उन के आगे है और जो कुछ उन के पीछे है)

अल्लाह तआला का इरशाद है
ताके तुम जान लो के बेशक अल्लाह हर चीज़ पर खूब कुदरत रखने वाला है और ये के बेशक अल्लाह ने यक़ीनन हर चीज़ को इल्म से घैर रखा है। (अत-तलाक़ 12)

दुसरी जगा अल्लाह का इरशाद है
और उसी के पास गैब की चाबियां हैं, उन्हें उस के सिवा कोई नहीं जनता और वह जनता है जो कुछ खुश्की और समुन्दर में है और कोई पत्ता नहीं गिरता मगर वह उसे जनता है और ज़मीन के अंधेरों में कोई दाना नहीं और न कोई तर है और न ख़ुश्क मगर वह एक वाज़िह किताब है।

आयतुल कुर्सी का सातवा जुमला (Ayatul Kursi in Hindi)

وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ

वला युहीतू-न बिशैइम मिन इलमिहि इल-ल बिमा शाअ (और वह उस की मालूमात में से किसी चीज़ का भी अहाता नहीं कर सकते मगर जो वह चाहे।)

अल्लाह तआला ने अपने इल्म से मख़लूक़ात को जितना इल्म दिया है उन के पास उतना ही इल्म है, उससे ज़ियादा जानने का उन के पास कोई ज़रीआ नहीं, और न वह अपने इल्म से उस का अहाता कर सकते है।

क़ुरआन मजीद में अल्लाह का इरशाद है
केह दीजिये में नहीं जनता आया वह चीज़ क़रीब है जिस का तुम से वादा किया जाता है, या मेरा रब उस के लिये कुछ मुद्दत रखेगा। (वह) गैब को जानने वाला है पस अपने गैब पर किसी को खबर नहीं देता। मगर कोई रसूल, जिसे वह पसंद करले तो बेशक वह उस के आगे और उस के पीछे पहरा लगा देता है। ताके जान ले के बेशक उन्होंने वाक़ई अपने रब के पैग़ामात पहुंचा दिये हैं और उस ने उन तमाम चीज़ों का अहाता कर रखा है जो उन के पास है और हर चीज़ को गिन कर शुमार कर रखा है।

आयतुल कुर्सी का आठवा जुमला (Ayatul Kursi in Hindi)

وَسِعَ كُرْ‌سِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْ‌ضَ

व सिआ कुर सिय्युहुस समावाति वल अर्ज़ (उस की कुर्सी आसमानों और ज़मीन पर हावी है)

अर्श और कुर्सी

अगर कोई सवाल करे के अल्लाह कहा है तो जवाब ये होगा के वह आसमान पर है

जैसा क़ुरआन में इरशाद है
किया तुम उससे बे खौफ होगए हो जो आसमान पर है के वह तुम्हे ज़मीन में धंसादे, तो अचानक वह हरकत करने लगे? या तुम उससे बे खौफ हगए हो जो आसमान पर है के वह तुम पर पथराव वाली आंधी भेज दे, फिर अनक़रीब तुम जान लोगे के मेरा डराना केसा है? (मुल्क 16-17)

अब अगर कोई ये सवाल करे के अल्लाह आसमान के ऊपर कहां है तो जवाब ये होगा के वह अर्श पर मुस्तवी है

जैसा के क़ुरआन करीम में है
वह बे हद रहम वाला अर्श पर बुलंद है (ताहा 5)

आयतुल कुर्सी का नवा जुमला (Ayatul Kursi in Hindi)

وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا

व-ल यऊदुहु हिफ़्ज़ुहुमा (और दोनों (ज़मीन और आसमान) की हिफाज़त उस पर मुश्किल नहीं)

अल्लाह तआला पर आसमानों और ज़मीन की हिफाज़त ज़रा भी मुश्किल नहीं गुज़रती और न उनकी हिफाज़त करने की वजा से उसे कोई थकावट लाहिक होती है के उसे किसी शरीक या मदद गार की ज़रूरत पड़े।

आयतुल कुर्सी का दसवा जुमला (Ayatul Kursi in Hindi)

وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ

व-हुवल अलिययुल अज़ीम (और वोही बुलंद और अज़ीम है)

क़ुरआन करीम में अल्लाह तआला की ये दोनों सिफ़ात एक और मुक़ाम पर एक साथ आई है

अल्लाह तआला फ़रमाता है
और वोही है बे हद बुलंद, बड़ी अज़मत वाला है (शूरा 4)

इस मुक़ाम पर अल्लाह तआला की जो सिफ़ात बयान हुई है इन में ये आखरी सिफ़ात है जिन में अल्लाह रब्बुल आलमीन की अज़मत व बुलंदी को बयान किया गया है के अज़मत और बुलंदी सिर्फ अल्लाह की ज़ात के साथ खास है और वह तनहा अज़मत व बुलंदी वाला है और तमाम दीगर सिफ़ात की तरह इन सिफ़ात में भी उस का कोई शरीक नहीं।

आख़री बात Conclusion

आयतुल कुर्सी हिंदी में तर्जुमा के साथ आप ने पढ़ा है और जो लोग Ayatul Kursi in Roman English में पढ़ना चाहते है वो भी पढ़ सकते है Ayatul Kursi Roman English Mein Trajuma Ke Saath आप ने देखा है। आयतुल कुर्सी हिंदी में तर्जुमा के साथ पढ़े तभी हमको आयतुल कुर्सी की फ़ज़ीलत का अंदाज़ा होगा। आयतुल कुर्सी की फ़ज़ीलत भी आप ने पढ़ा है। आयतुल कुर्सी हिंदी में पढ़े और अपने दोस्तों को शेर करे साथ ही अपनी दुआओं मे हमे याद रखे.

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