Aqiqah Karne Ka Tariqa | Aqiqah Ki Dua | अक़ीक़ा करने का तरीक़ा और दुआ

Aqiqah Karne Ka Tariqa
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Aqiqah Karne Ka Tariqa | Aqiqah Ki Dua |

अक़ीक़ा करने का तरीक़ा और दुआ

इस दुनिया में अल्लाह ने इंसान को पैदा करने के साथ ही एक से बढ़कर नेअमतें अता कीं हैं, जैसे माल, औलाद, वगैरा लेकिन इन तमाम नेअमतों में औलाद की नेअमत बहुत बड़ी है, तो अगर अल्लाह ने आप को औलाद जैसी नेअमत अता की, तो सातवें दिन उसका नाम रखें और अक़ीक़ा (Aqiqah) करें

नीचे हम अक़ीक़ा करने का तरीक़ा ( Aqiqah Karne Ka Tariqa ) और अक़ीक़ा की दुआ ( Aqiqah Ki Dua ) बयान करेंगे और साथ ही अक़ीक़े से रिलेटेड कुछ सवालों के जवाब बयान करेंगे जो कि आम तौर से लोगों के ज़हनों में होते हैं

अक़ीक़ा की दुआ | Aqiqah ki dua in hindi

आप को कोई लम्बी चौड़ी दुआ पढ़ने की ज़रुरत नहीं है बस ये छोटी दी दुआ पढ़ लें जो हदीस में मौजूद है और हज़रत आयेशा (रज़ियल लाहू अन्हा) की बताई हुई है, वो दुआ ये है …

बिस्मिल्लाहि वल्लाहु अकबर, अल्लाहुम्मा लका व इलैका, हाज़ा अक़ीक़तु फ़ुला

Bismillahi Wal Lahu Akbar, Allahumma Laka Wa Ilaika, Haza Aqiqatu Fulan

( फुलां की जगह जिसके नाम अक़ीक़ा हो रहा हो उसका नाम ले लें )

Translation : अल्लाह के नाम से जो अल्लाह बहुत बड़ा है, ए अल्लाह ! ये अक़ीक़ा तेरे लिए है और तेरी ही खिदमत में हाज़िर है, और ये अक़ीक़ा फलां ( जैसे ज़ैद या हामिद ) की तरफ़ से है

अक़ीक़ा किसे कहते ? Aqiqah Ka Meaning

अक़ीक़ा बच्चे की पैदाइश का शुकराना है, यानि अल्लाह ने आपको औलाद की नेअमत से नवाज़ा है तो उसके शुक्राने के तौर पर क़ुरबानी करना

अक़ीक़ा करने का सुन्नत तरीक़ा | Aqiqah Ka Sunnat Tariqa

जब घर में बच्चे की पैदाइश हो तो सातवें दिन उसका अक़ीक़ा कर दें, यानि अगर लड़का है तो उसकी तरफ़ से दो बकरे और अगर लड़की है उसकी तरफ़ से एक एक बकरा या बकरी की क़ुरबानी करे

अक़ीक़ा क्यूँ करें ? Aqiqah Kyun Karen

इस से बच्चे पर आने वाली बलाएं दूर हो जाती हैं, और बेशुमार मुसीबतें उस पर से टल जाती हैं और जब तक अक़ीक़ा नहीं होता वो बच्चा अंदेशों में घिरा रहता है

शरीअत में अक़ीक़ा का हुक्म क्या है ? Aqiqah Ka Hukm Islam Me

अक़ीक़ा किसी भी मुसलमान पर फ़र्ज़ या वाजिब नहीं है बल्कि मुस्तहब है, और मुस्तहब का मतलब ये होता है कि अगर आपने वो काम कर लिया तो इसका सवाब मिलेगा और अगर नहीं किया तो अज़ाब नहीं होगा

बच्चे की तरफ़ से अक़ीक़ा किस को करना चाहिए ? Aqiqah Kise Karna Chahiye

असल ज़िम्मेदारी बाप की होती है कि वो अपने बच्चे के अक़ीक़े का इन्तेजाम करे, लेकिन अगर ननिहाल वाले अक़ीक़ा करना चाह रहे हैं तो इस में भी कोई हरज नहीं है क्यूंकि ख़ुद हमारे प्यारे नबी (सल्लल लाहू अलैहि वसल्लम) ने अपने दोनों नवासे (हज़रत हसन और हज़रत हुसैन रज़ियल लाहू अन्हुमा) का अक़ीक़ा फ़रमाया था

अक़ीक़े में कितने जानवर ज़बह करने चाहियें ? Aqiqah Me Kitne Janwar Zabah Karen

लड़के की तरफ़ से दो बकरे या बकरियां

लड़की की तरफ़ से एक बकरा या बकरी

लेकिंन अगर दो बकरे ज़बह करने की गुन्जाइश न हो तो क्या करें ?

अगर आपका लड़का है और अक़ीक़ा करना चाहते हैं लेकिन दो बकरों की गुन्जाइश नहीं है, तो आप एक ही बकरे पर लड़के का अक़ीक़ा कर सकते हैं, और अगर आपकी हैसियत अक़ीक़ा कर पाने की नहीं है और आप नहीं कर रहे हैं तो इस में कोई हरज और गुनाह नहीं है

अक़ीक़ा किस दिन करें ? Aqiqah Kis Din Karen

सब से बेहतर तो ये है कि बच्चे की पैदाइश के सातवें दिन कर दिया जाये जैसे अगर जुमा को बच्चा पैदा हुआ है तो जुमेरात को अक़ीक़ा कर दें

अगर सातवें दिन अक़ीक़ा न कर सकें तो…

अगर अक़ीक़ा सातवें दिन न हो सका तो 14 वें दिन या 21 वें दिन कर दें वरना जब भी अक़ीक़ा करें तो कोशिश करें कि दिनों के हिसाब से सातवां दिन हो

क्या बच्चे की तरफ़ से दुसरे शहर में अक़ीक़ा किया जा सकता है ?

बच्चा दुसरे शहर में है और बकरा दुसरे शहर में, तो इस में कोई हरज नहीं है अक़ीक़ा किया जा सकता है, बस इतना ख्याल रखें कि जब अक़ीक़े के बकरे ज़बह हो जाएँ तो बच्चे के बाल मूँड दिए जाएँ

बड़े जानवर में क़ुरबानी के साथ अक़ीक़ा का हिस्सा लेना | Qurbani Me Aqiqah

ईदुल अज़हा में एक बड़े जानवर की क़ुरबानी होने जा रही थी जिसमें सात हिस्से थे तो उसी में से एक हिस्सा क्या मैं अक़ीक़े की नियत से ले सकता हूँ

हाँ ! बिकुल ले सकते हैं, क़ुरबानी के जानवर में अक़ीक़े की नियत से हिस्सा लिया जा सकता है, लेकिन अफज़ल तो यही है कि अक़ीक़े के लिए बकरे की क़ुरबानी करें

क्या बड़े हो जाने पर अक़ीक़ा कर सकते हैं ?

अगर किसी का अक़ीक़ा बचपन में न हुआ हो तो वो चाहे तो बड़े होने के बाद भी कर सकता है लेकिन सातवें दिन मुस्तहब वक़्त की जो फ़ज़ीलत है वो हासिल नहीं हो सकती ?

क्या अक़ीक़े में दावत ज़रूरी है ?

अक़ीक़े में क़ुरबानी कर के दावत करना ज़रूरी नहीं है, आप चाहें तो कच्चा गोश्त तकसीम कर दें जैसे बक़रीद में करते हैं या ग़रीबों को खिला दें या पका कर घरों में भिजवा दें या मुख़्तसर दावत कर दें

अक़ीक़े के जानवर का गोश्त और खाल | Aqiqah Ke Janwar Ka Gosht Aur Khaal

अक़ीक़े में भी गोश्त और खाल का वही हुक्म है जो क़ुरबानी के गोश्त और खाल में है

अक़ीक़े में सर के बाल मूंडना

बचपन में अगर अक़ीक़ा किया गया है तो मुस्तहब है कि बच्चा या बच्ची के बाल मूंड कर उसके वज़न के बराबर सोना या चांदी या उसकी कीमत सदक़ा कर दें

लेकिन अगर बड़ी उमर में अक़ीक़ा किया जा रहा है तो सर के बाल मूंडना ज़रूरी नहीं है, बल्कि बड़ी उम्र की लड़की के बाल मूंडना नाजाएज़ है

बच्चे के बाल ज़बह करने से पहले मूंड या बाद में

ज़बह करने के साथ साथ बाल मूंडना ज़रूरी नहीं है बल्कि पहले या बाद में जब आसानी हो मूंड सकते हैं

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