Allah Ka Zikr/Fazilat Kaise Kare in Hindi | अल्लाह का ज़िक्र कैसे करे

Allah ka Zikr
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हमारे इस आर्टिक्ल मे आप लोगों का वैल्कम है उम्मीद है के आप सभी लोग ख़ैरियत से होंगे। आज इस पोस्ट मे हम Allah Ka Zikr Kaise Kare इस बारे मे जानेंगे। अल्लाह के ज़िक्र करने की बहुत अहमियत और फ़ज़ीलत कुरान व हदीस मे आई है। अल्लाह का ज़िक्र करने से पहले ये जानना ज़रूरी है के अल्लाह का ज़िक्र कैसे करे। सबसे पहले आप ये जानलें के अल्लाह तआला ने इन्सानों को उसकी इबादत के लिए पैदा किया और उसके साथ किसी को शरीक ना करें।

अल्लाह तआला ने कूरआन मजीद में फ़रमाया

“मेने जिन्नात और इंसानो को सिर्फ़ इसलिए पैदा किया के वो मेरी इबादत करें” (ज़ारियात 56)

अल्लाह का ज़िक्र उस्तरीक़े से करो जैसा की अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें हुक्म दिया हे हदीस में आता है

“जिसने दीने इस्लाम में कोई एसी चीज़ निकाली जो दीन में नहीं हे तो वो चीज़ मरदूद हे” (इबने माजा 14)

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Allah Ka Zikr Kaise Kare in Quran (अल्लाह का ज़िक्र कैसे करे)

ए ईमान वालों अल्लाह की इताअत करो और उसके रसूल की इताअत करो और अपने आमाल को बातिल (खराब) ना करो (सूरह मुहम्मद 33)

कूरआन पाक की इस आयत से पता चलता हेके दीन का कोई भी अमल हो या ज़िक्र हो जब्तक उसके करने का सबूत क़ुरआन व हदीस से नहीं मिलता फिर चाहे वो कितनी ही खालिस (अच्छी) निय्यत से करें और सवाब की निय्यत से करे उसका कोई फ़ाइदा नहीं हें, क्यूंके अमल वो ही कबूल होगा जो अल्लाह और नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हुक्म के मुताबिक़ हो।

अल्लाह का ज़िक्र कैसे करे | Allah Ka Zikr Kaise Kare Hadees

हज़रते अबू हुरैरा रज़ियल्ललाहु अनहु ने बयान किया के नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया अल्लाह तआला फ़रमाता हे के में अपने बंदे के गुमान के साथ हूं और जब वो मुझे दिल में याद करता हे तो में भी उसे अपने दिल में याद करता हूं और जब वो मुझे मजलिस में याद करता हेतो में उसे उससे अच्छे फ़रिश्तों की मजलिस में याद करता हूं

और अगर वो मुझ से एक बालिश पास आता हेतो में उससे एक हाथ पास होजाता हु और अगर वो मुझसे एक हाथ क़रीब आता हेतो में उससे दो हाथ क़रीब होजाता हूं और अगर वो मेरी तरफ़ चल कर आता हेतो में उसके पास दोड़ कर आजाता हूं (सही बुखारी 7405)

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अल्लाह का जिक्र करने की फ़ज़ीलत | Zikr Ki Fazilat Hindi

Zikr Ki Fazilat in Hindi: “जो लोग ईमान लाए उनके दिल अल्लाह के ज़िक्र से इतमिनान (सुकून) हासिल करते हें याद रखो अल्लाह के ज़िक्र सेही दिलों को इतमिनान मिलता हे” (सूरह राद 28)

Zikr Ki Fazilat in Hindi: “ए ईमान वालों अल्लाह तआला का ज़िक्र बोहत ज़्यादा किया करो” (सूरा अहज़ाब)

Allah Ke Zikr Ki Fazilat in Hindi: “उठते बैठते और लेटे अल्लाह तआला का ज़िक्र करते रहो” (सूरा निसा 103)

Zikr Ki Fazilat in Hindi: अल्लाह तआला के ज़िक्र की फ़ज़ीलत येहेकी अल्लाह तआला अपने बंदे को कामयाब करदेता है “ए ईमान वालों जब किसी फोज से तुम्हारा मुक़ाबला हो तो साबित क़दम रहा करो और अल्लाह  को कसरत से याद किया करो ताकि तुम फ़लाह पा जाओ ” (सूरह अनफ़ाल 45)

अल्लाह का जिक्र करने की फ़ज़ीलत हदीस

नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया उस आदमी की मिसाल जो अपने रब को याद करता हे और उसकी मिसाल जो अपने रब को याद नहीं करता ज़िन्दा और मुर्दा जेसी है (सही बुख़ारी 6407)

इस हदीस से हमको अल्लाह के जिक्र की फ़ज़ीलत मालूम होती हे यानि जो आदमी अल्लाह का जिक्र करता हे उसे जिंदा आदमी के मानिंद बताया गया है और जो अल्लाह का ज़िक्र ना करे वो जिंदा रेहकर भी मुर्दा है।

Allah Ka Zikr 1:सुबहानल्लाही व बिहमदिही की फ़ज़ीलत

नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया जिसने सुबहानल्लाही व बिहमदिही दिन में 100 बार कहा उसके गुनाह माफ़ करदीये जाते हें फ़िर उसके गुनाह समुंदर के झाग के बराबर ही क्यू ना हो (सही बुख़ारी 6405)

Allah Ka Zikr 2: सुबहानल्लाही व बिहमदिही सुबहानल्लाहिल अज़ीम की फ़ज़ीलत

नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया दो कलमे जो ज़बान पर हल्के हें तराज़ू में बोहत भारी और रेहमान को अज़ीज़ हे (सही बुख़ारी 6406)

10 Gulamo Ko Azad Ka Sawab

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया जिसने ये कलमा

“ला इला-ह इल्लल्लाहु, वह-दहू ला शरी-क लहू, लहुल मुलकु व-लहुल हमदु, व-हुवा अला कुल्लि शैइंक़दीर”

तर्जुमा: अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, वह अकेला हे उसका कोई शरीक नहीं उसी के लिए बादशाही है और उसी के लिए तारीफ़ें हें और वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखने वाला है।

जिसने इसे दिन मे 100 बार पढ़ा उसे 10 गुलाम आज़ाद करने का सवाब मिलेगा और उसके लिए 100 नेकियां लिखदी जाएगी और उसकी 100 बुराइयां मिटादी जाएंगी और उसदीन वो शैतान के शर से मेहफ़ूज (बचा) रहेगा शाम तक केलिए और कोई आदमी उसदिन उससे अच्छा काम करने वाला नहीं समझा जाएगा सिवाए उसके जो उससे ज़्यादा करे
(सही बुख़ारी 6403)

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Allah Ke Naam Ke Fayde | अल्लाह के नाम के फ़ायदे

नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया के अल्लाह तआला के 99 नाम हें जो आदमी इन्हें याद करलेगा जन्नत में जाएगा अल्लाह ताक़ (odd number) है और ताक़ को पसंद करता है (सही बुख़ारी 6410)

दिन भर करने वाले ज़िक्र

  • अल्लाह का ज़िक्र सुबह व शाम के अज़कार का पढ़ना
  • Allah Ka Zikr नमाजों के बाद का ज़िक्र
  • खाने पीने के अज़कार के ज़रिया अल्लाह का ज़िक्र
  • सोने उठने बेठने के वक़्त अल्लाह का ज़िक्र
  • अल्लाह का ज़िक्र घर से निकलने घर में जाने के अज़कार
  • Allah Ke Zikr मे मस्जिद में दाखिल होने मस्जिद से निकलने के अज़कार भी है
  • अल्लाह का ज़िक्र बाज़ार में जाने के अज़कार
  • अल्लाह का ज़िक्र मजलिस से उठने के अज़कार

आखरी बात: अल्हमदु लिल्लाह आज के इस लेख में हम लोगों ने अल्लाह का ज़िक्र और उसकी फ़ज़ीलत के बारे में पढ़ा और सीखा है और अगर आदमी चाहता हेकी उसके दिल और दिमाग को सुकून मिले तो उसे चाहिए के वो अल्लाह का ज़िक्र करे इसमे दुन्या व आखिरत दोनों की भलाई है | आप लोगों ने अल्लाह का ज़िक्र कैसे करे ये जान लिया है अल्लाह से दुआ है के हम सब को अल्लाह अपना ज़िक्र करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

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