6 Kalma in Hindi Tarjuma Ke Sath | छह कलमा और उनका हिंदी अनुवाद

6 Kalma
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6 Kalma in Hindi Tarjuma Ke Sath: अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व ब-रकातुह इस पोस्ट में आप जानेंगे के कलमा क्या है और क़ुरआन व हदीस में Kalima के बारे में किया हैं। किसी भी इबादत या किसी भी अमल की फ़ज़ीलत सिर्फ़ सुन लेना और उसे मानना ये इस्लाम नहीं है अगर आप किसी भी अमल को करना चाहते है या कोई काम सवाब की निय्यत से करना चाहते है तो उस काम या अमल का क़ुरआन और सही हदीस से साबित होना ज़रूरी है तभी आप का वो अमल या नेकी क़बूल होगी।

ऐसे ही आप ने 5 Kalima या 6 Kalma के बारे में सुना होगा। अगर कोई ये समझता है के 6 Kalma याद करना या बच्चो को याद करादेना ये ही इस्लाम है तो ये बात ग़लत है कियुंके क़ुरआन और सही हदीस में 6 Kalima के बारे में सबूत नहीं मिलता है। कलमा सिर्फ़ दो ही है Awwal Kalma और Dusra Kalma नबी सल्लाहु अलैहि वसलम, सहाबा, ताबईन और तबा ताबईन के ज़माने के बाद किसी ने तरतीब देकर इसे 6 Kalma बनाकर इसे कलमा का नाम दिया है। इस पोस्ट में आप को 6 कलमा (6 Kalma in Hindi Tarjuma Ke Sath) के बारे में बाऐंगे इसे पूरा पढ़े।

6 Kalme Jo In Namo Se Mash-hoor Hai

  1. पहला कलमा तय्यब – Pehla KalmaTayyab
  2. दूसरा कलमा शहादत – Dusra Kalma Shahaadat
  3. तीसरा कलमा तम्जीद – Teesra Kalma Tamjeed
  4. चौथा कलमा तौहीद – Choutha Kalma Tauheed
  5. पांचवा कलमा इस्तिग़फ़ार – Panchwa Kalma Istighfar
  6. छटटा कलमा रद्दे कुफ़्र – Chatta Kalma Radde Kufr

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6 Kalma in Hindi Tarjuma Ke Sath

Ye Six Kalima kisi bhi sahee hadees se sabit nahi hai aur kisi bhi Sahabi se bhi sabit nahi hai aur na kisi imam se. Imam Abu Haneefa Rahmahullah se bhi sabit nahi hai. Ye duaae hai Kalma nahi. Kalma 2 hi hai Awwal Kalma Tayyab aur Dusra Kalma Shahaadat.

पहला कलमा तय्यब हिंदी

لَآ اِلٰهَ اِلَّا اﷲُ مُحَمَّدٌ رَّسُوْلُ اﷲِ

ला इलाहा इल-लल्लाहु मुहम्मदुर-रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)

La Ilaha Illallaahu Muhammadur Rasoolullaah (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)

पहला कलमा तय्यब तर्जुमा हिंदी

अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लाईक नहीं और मुहम्मद सल-लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल है।

Pehla Kalma Ki Daleel

ये कलमा हदीस पाक से साबित है। मगर इन कलमात को हदीस में Kalma Tayyaba की बजाए कलमातुत-तक़वा “كلمة التقوى” के नाम से ज़िक्र किया गया है और कई रिवायत में इन कलमात को पढ़ने की फ़ज़ीलत भी बयान हुई है।

हदीस- सय्यदना अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते है के आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: अल्लाह तआला ने अपनी किताब में तकब्बुर करने वाली एक क़ौम का ज़िक्र फ़रमाया है ” यक़ीनन जब उन्हें لاالہ الااللہ कहा जाता है तो तकब्बुर करते है और अल्लाह तआला ने फ़रमाया: जब कुफ्ऱ करने वालों ने अपने दिलो में जाहिलियत वाली ज़िद रखी तो अल्लाह ने अपना सुकून और इत्मीनान अपने रसूल और मोमिनों पर उतारा और उन के लिए कलमातुत-तक़वा लाज़िम क़रार दिया और इस के ज़ियादा मुस्तहिक़ और अहल थे और वह (कलमातुत-तक़वा) ’’لا إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ مُحَمَّدٌ رَسُولُ اللهِ‘‘ है।

हुदैबिया वाले दिन जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुद्दत (मुक़र्रर करनने) वाले फैसले में मुशरिकीन से मुआहिदा किया था तो मुशरिकीन ने इस कलमा से तकब्बुर किया था “

[किताबुल अस्मा वासिफ़तुल-बहकी: जिल्द नंबर 1 पेज नंबर 263 हदीस नंबर 195]

दूसरा कलमा शहादत हिंदी

 اَشْهَدُ اَنْ لاَّ اِلٰهَ اِلاَّ اﷲُ وَحْدَهُ لَا شَرِيْکَ لَهُ، وَاَشْهَدُ اَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُوْلُهُ

अशहदु अल्ला इला-ह इल्लल्लाहु वह-दहु ला शरी-क लहू व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू

Ash Hadu Alla Ilaaha Illallaahu Wah Dahoo La Shareeka Lahoo Wa Ash Hadu Anna Muhammadan Abduhoo Wa Rasooluhoo

दूसरा कलिमा शहादत तर्जुमा हिंदी

में इस बात की गवाही देता हु के अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, वो अकेला है उसका कोई शरीक नहीं, और में गवाही देता हूँ के मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उसके बन्दे और रसूल है।

Dusra Kalma Ki Daleel

ये कलमात कमी बेशी के साथ अहादीस से साबित है, अहादीस में इनको Kalma शहादत के बजाए वज़ू के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ और अहादीस में इसकी बड़ी फ़ज़ीलत बयान की गई है।

हदीस 1– रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: तुम में से जो शख्स भी अच्छी तरह वज़ू करे, फिर वज़ू से फ़ारिग़ होने के बाद ये दुआ पढ़े أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ، وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ में इस बात की गवाही देता हु के अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, वो अकेला है उसका कोई शरीक नहीं, और में गवाही देता हूँ के मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उसके बन्दे और रसूल है। तो उस शख्स के लिए जन्नत के आठो दरवाज़े खोल दिए जाएंगे, वह जिस दरवाज़े से चाहे दाखिल हो।
[सही मुस्लिम 243] [सुनन अबू दावूद 169]

हदीस 2– नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: जो शख्स दिन भर में सो (100) मर्तबा ये दुआ पढ़े गा لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ ، لَا شَرِيكَ لَهُ ” لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ” नहीं है कोई माबूद, सिवाए अल्लाह तआला के, उसका कोई शरीक नहीं, मुल्क उसी का है और तमाम तारीफें अल्लाह ही के लिए है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। तो पढ़ें ने वाले को दस ग़ुलाम आज़ाद करने के बराबर सवाब मिलेगा सो नेकिया उसके नामए आमाल में लिखी जाएंगी और सो बुराइयां उससे मिटा दी जाएंगी। उस रोज़ दिन भर ये दुआ शैतान से उसकी हिफाज़त करती रहेगी जब तक के शाम होजाए और कोई शख्स इस से बेहतर अमल लेकर न आएगा। मगर जो इस से भी ज़ियादा कलमा पढ़ले।
[सहीह बुखारी 3293]

तीसरा कलमा हिंदी में

سُبْحَانَ ﷲِ، وَالْحَمْدُ ﷲِ، وَلَآ اِلٰهَ اِلَّااللہُ، وَﷲُ اَکْبَرُ، وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ اِلَّا بِاﷲِ الْعَلِيِ الْعَظِيْمِ

सुब्हानल्लाही, वल हम्दु लिल्लाहि, वला इलाहा इल्लल्लाहु, वल्लाहु अकबर, वला हौल वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल एलिय्यिल अज़ीम

Subhanallaahi Wal Hamdulillaahi Walaa Ilaaha Illallaahu Wallaahu Akbar Walaa Haula Walaa Quwwata Illa Billahil Aliyyil Azeem

तीसरा कलिमा का तर्जुमा

अल्लाह की पाकी बयान करता हु, तमाम तारीफें अल्लाह ही के लिए है, अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, अल्लाह ही सब से बड़ा है, और ना किसी में ताक़त है ना बल ताक़त और क़ुव्वत तो सिर्फ़ अल्लाह में है जो बहुत अज़मत वाला और बड़ा है।

Teesra Kalma Ki Daleel

ये कलमात इस तरतीब सुव्वम कलमा तम्जीद के नाम से किसी हदीस में मौजूद नहीं, हां ये कलमात रात को आँख खुलने पर पढ़ी जाने वाली एक दुआ का टुकड़ा है, इसी तरह नमाज़ तस्बीह में पढ़े जाने वाले कुछ कलमात भी इसमें से है। दो अलग अलग अहादीस में भी ये कलमात आए है।
हदीस – उबादह बिन सामित रज़ियल्लाहु अन्हु कहते है के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: जो रात में बेदार हो और आँख खुलते ही ये दुआ पढ़े

“لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ،‏‏‏‏ لَهُ الْمُلْكُ،‏‏‏‏ وَلَهُ الْحَمْدُ،‏‏‏‏ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ،‏‏‏‏ سُبْحَانَ اللَّهِ،‏‏‏‏ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ،‏‏‏‏ وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ،‏‏‏‏ وَاللَّهُ أَكْبَرُ،‏‏‏‏ وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ الْعَلِيِّ الْعَظِيمِ”

अल्लाह के इलावा कोई सच्चा माबूद नहीं, वह एक है उसका कोई शरीक नहीं, उसी के लिए बादशाहत है और उसी के लिए हम्दो सना है, वोही हर चीज़ पर क़ादिर है, अल्लाह की पाकी बयान करता हु, तमाम तारीफें अल्लाह ही के लिए है, अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, अल्लाह ही सब से बड़ा है, ताक़त और क़ुव्वत बुलंद व बरतर की तौफ़ीक़ से है।
फिर ये दुआ पढ़े:

“رَبِّ اغْفِرْ لِي” एअल्लाह मुझे बख्श दे तो वह बख्श दिया जाएगा
वलीद कहते है: या यूं कहा, अगर वह दुआ करे तो उसकी दुआ क़बूल होगी और अगर उठकर वज़ू करे, फिर नमाज़ पढ़े तो उस की नमाज़ क़बूल होगी।

[सहीह बुखारी 1154], [सुनन इब्ने मजा 3878], [सुनन अबू दाऊद 5060], [सुनन तिर्मिज़ी 3414]

चौथा कलमा तौहीद हिंदी में 

لَآ اِلٰهَ اِلاَّ ﷲُ وَحْدَهُ لَاشَرِيْکَ لَهُ، لَهُ الْمُلْکُ وَلَهُ الْحَمْدُ، يُحْی وَيُمِيْتُ، وَهُوَ حَيٌّ لَّا يَمُوْتُ اَبَدًا اَبَدًا، ذُوالْجَلَالِ وَالْاِکْرَامِ، بِيَدِهِ الْخَيْرُ، وَهُوَعَلٰی کُلِّ شَيْئٍ قَدِيْر

ला इलाह इल्लल्लाहु वह्दहु ला शरीक लहू، लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु, युहयी व युमीतु, वहुवा हय्युल ला यमूतु अबदन अबदा, ज़ुल जलालि वल इकराम, बियदि-हिल खैर, वहुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर

La Ilaaha Illaalaahu Wahdahu La Shareeka Lahu, Lahul Mulku Walahul Hamdu, Yuhyi Wa Yumeetu, Wa Huwa Hayyul La Yamootu Abadan Abada, Zul Jalali Wal Ikraam, Biyadihil Khair, Wahuwa Ala Kulli Shay-in Qadeer.

चौथा कलमा तौहीद का तर्जुमा

अल्लाह के सिवा कोइ माबूद नही, वह एक है और उसका कोइ साझीदार नही, सब कुछ उसी का है और तमाम तारीफ़ें उसी के लिए है. वोही ज़िंदा करता है और वोही मारता है, और वह ज़िंदा है, उसे कभी मौत नही आएगी, वह बड़े जलाल और बुज़रुगी वाला है. अल्लाह के हाथ में सारी भलाई है और वह हर चीज़ पर क़ुदरत रखकता है।

Chautha Kalma Ki Daleel

इन में से कुछ अल्फ़ाज़ अहादीस में दुआओ के बारे में बयान किये गए है लेकिन इस नाम के साथ हदीस से साबित नहीं है।
हदीस – नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इरशाद फ़रमाया: जो शख्स फज्र के बाद जबके वह पैर मोड़े (दो ज़ानों) बैठा हुवा हो और कोई बात भी न की हो

“لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ”

दस मरतबा पढ़े तो उस के लिए दस नेकियां लिखी जाएंगी और उस की दस बुराइयां मिटा दी जाएंगी, उस के लिए दस दरजे बुलंद किये जाएंगे और वह उस दिन पुरे दिन भर हर तरह की मकरूह व ना पसन्दीदाह चीज़ से महफूज़ रहेगा और शैतान के ज़ैर असर न आपाने के लिए उसकी निगेहबानी की जाएगी और कोई गुनाह उसे उस दिन सिवाए शिर्क बिल्लाह के हलाकत से दो चार न करसकेगा।
[सुनना तिर्मिज़ी 3474]

पांचवा कलमा हिंदी में

اَسْتَغْفِرُ ﷲَ رَبِّيْ مِنْ کُلِّ ذَنْبٍ اَذْنَبْتُهُ عَمَدًا اَوْ خَطَاً سِرًّا اَوْ عَلَانِيَةً وَّاَتُوْبُ اِلَيْهِ مِنَ الذَّنْبِ الَّذِيْ اَعْلَمُ وَمِنَ الذَّنْبِ الَّذِيْ لَآ اَعْلَمُ، اِنَّکَ اَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوْبِ وَسَتَّارُ الْعُيُوْبِ وَغَفَّارُ الذُّنُوْبِ وَلَاحَوْلَ وَلَا قُوَّةَ اِلَّا بِاﷲِ الْعَلِيِّ الْعَظِيْمِ،

व अतूबु इलैह मिनज़ ज़म्बिल लज़ी आलमु व मिनज़ ज़म्बिल लज़ी ला आलमु, इन्नका अंता अल्लामुल गुयूबि व सत्तारिल उयूबि व ग़फ़्फ़ारुज़ ज़ुनूबि वला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अज़ीम|

पांचवा कलमा का तर्जुमा

में अपने रब से अपने तमाम गुनाहो की माफ़ी मांगता हूं जो मेने जानबूझ कर किये या भूल चूक में किये, छुप कर किये या खुल्लम-खुल्ला किये और तौबा करता हूं में उस गुनाह से जो में जनता हूं और उस गुनाह से भी जो में नही जनता. या अल्लाह बेशक तू ग़ैब की बातों को जानने वाला है और ऐबों को छिपाने वाला है और गुनाहो को बख्शने वाला है और (हम में) गुनाहो से बचने और नेकी करने की ताक़त नही अल्लाह के बगैर जो के बोहुत बुलंद अज़मत वाला है।

Panchwa Kalma Ki Daleel

ये अल्फ़ाज़ पांचवा कलमा इस नाम से क़ुरआन और हदीस में नहीं है खुद से बनाए गई दुआ इस्तिग़फ़ार है।

छठा कलमा हिंदी में (6 Kalam)

اَللّٰهُمَّ اِنِّيْ اَعُوْذُ بِکَ مِنْ اَنْ اُشْرِکَ بِکَ شَيْئًا وَّاَنَا اَعْلَمُ بِهِ وَاَسْتَغْفِرُکَ لِمَا لَآ اَعْلَمُ بِهِ تُبْتُ عَنْهُ وَتَبَرَّاْتُ مِنَ الْکُفْرِ وَالشِّرْکِ وَالْکِذْبِ وَالْغِيْبَةِ وَالْبِدْعَةِ وَالنَّمِيْمَةِ وَالْفَوَاحِشِ وَالْبُهْتَانِ وَالْمَعَاصِيْ کُلِّهَا وَاَسْلَمْتُ وَاَقُوْلُ، لَآ اِلٰهَ اِلَّا اﷲُ مُحَمَّدٌ رَّسُوْلُ اﷲِ

अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ुबिका मिन अन उशरिका बिका शय-अव व-अना आलमु बिही व अस्तग़फिरुका लिमा ला आलमु बिही तुब्तु अन्हु व तबर्रअतु मिनल कुफ़री वश-शिरकि वल किज़बि वल ग़ीबती वल बिदअति वन-नमीमति वल-फवाहिशि वल बुहतानि वल मआसी कुल्लिहा व अस्लमतु व अक़ूलु, ला इलाहा इल्लल्लाहु मुहम्मदुर रसूलुल लाह |

6 छठा कलमा का अनुवाद (6 Kalma)

ए अल्लाह में तेरी पनाह मांगता हूं इस बात से के में किसी चीज़ को तेरा शरीक बनाऊ जान बूझ कर और बखशिश मांगता हूं तुझ से उसकी जिसको में नहीं जनता और मेने इससे तौबा की और बेज़ार हुव कुफ्ऱ से शिर्क झूठ से और ग़ीबत से और बिदअत से और चुग़ली से और बेहयाइयों से और बोहतान से और तमाम गुनाहो से और में इस्लाम लाया और में कहता हूं के अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं और हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल है।

Chata Kalma Ki Daleel

छठा कलिमा इस नाम से भी क़ुरआन और हदीस में कोई सबूत नहीं है ये सब दुआइया कलमात है।

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Conclusion Aakhri Baat (6 Kalma in Hindi Tarjuma Ke Sath)

Is post me hamne aap ko 6 Kalma in Hindi Tarjuma Ke Sath bata hai aur in 5 kalma ya 6 kalma ki daleel bhi aap ko batai gai hai.

इन 6 कलमात को याद कराने के लिए कहा जाता है और ये इसको इमान से जोड़ा जाता है के जिस को याद नहीं उसका इमान कमज़ोर है। जब के होना ये चाहिए था के जो अज़कार और दुआए हदीस से साबित है जो नबी सल्लाहु अलैहि व सल्लम और सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम ने पढ़ा और उसके पढ़ने का हुक्म दिया उसे याद करना और पढ़ना चाहिए।

six Kalma की फ़ज़ीलत बयान की गई लेकिन हमारे बच्चो को सय्यदुल इस्तिग़फ़ार और सुबह व शाम के मसनून अज़कार नहीं बताये गए। 6 Kalma के बारे में कोई सही हदीस साबित नहीं है ये कलमात जो नाम से लोगो में मशहूर है इस नाम और तरतीब से सही हदीस में इसका सबूत नहीं मिलता है।

इन कलमात में जो अल्फ़ाज़ व दुआए है, इन में से जो हदीस में मौजूद है और नबी करीम सल्लाहु अलैहि व सल्लम से साबित है उनको याद करसकते है।

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